जोधपुर। पर्यावरण सेवा को जीवन का मिशन बना चुके जोधपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट और पर्यावरण संरक्षक संजय भण्डारी ने अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। उन्होंने अपने नवाचारपूर्ण कार्यों और अनोखी पर्यावरणीय सोच के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किया है।
संजय भण्डारी इससे पहले भी “हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड” (लंदन) में अपनी उपलब्धियों के लिए स्थान बना चुके हैं। उन्होंने अपशिष्ट सामग्री से 400 से अधिक सजावटी व कलात्मक वस्तुएं बनाकर एक सुंदर ग्रीन गैलरी गार्डन का निर्माण किया है, जो न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि रचनात्मक पुनर्चक्रण (Recycling) का जीवंत मॉडल भी बन गया है।

वर्ष 2017 से संजय भण्डारी ने रातानाडा पुलिस लाइन के पास स्थित ग्रीन गैलरी में करीब 250 प्रजातियों के 3,500 से अधिक पौधे लगाए हैं और उनका नियमित संरक्षण भी कर रहे हैं। उन्होंने एक विशेष बाल उद्यान भी तैयार किया है, जो पूरी तरह से कबाड़ की वस्तुओं से सजाया गया है — यह बच्चों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक है, बल्कि पर्यावरणीय सोच को विकसित करने का एक अनूठा जरिया भी है।
भण्डारी ने बीते वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए वृक्षारोपण और रीसायक्लिंग की अनेक मुहिम चलाई हैं। उनके प्रयासों को देश-विदेश में विभिन्न मंचों पर सराहा गया है और अनेक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया गया है।
बिंदु टाक, जोधपुर की जानी-मानी समाजसेवी और पर्यावरणविद्, संजय भण्डारी के इस प्रयास को एक प्रेरणादायक मॉडल मानती हैं। उनके अनुसार, “यदि हर मोहल्ला और वार्ड इस मॉडल को अपनाए, तो न केवल राजस्थान बल्कि देश भर में पर्यावरणीय सुधार संभव है।”
भण्डारी के इन नवाचारों को लेकर उन्हें इंटरनेशनल प्राइड अवार्ड, राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार, इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार, भारत गौरव सम्मान, ग्रीन पीस अवार्ड, इंटरनेशनल गोल्ड स्टार मिलेनियम अवार्ड (काठमांडू), ओसवाल समाज रत्न, आईसीएआई जोधपुर सम्मान, इंडियन आइकॉन अवार्ड सहित दर्जनों राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ा गया है। उन्हें वायुसेना महिला कल्याण संघ, लॉयन्स क्लब, बेटी एक मुस्कान संस्था, सिंघवी ट्रस्ट, सूरत, जैन युवा संघ, और रिच प्रोडक्शन, जोधपुर जैसी संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया गया है।
भण्डारी का कहना है, “जब मैंने देखा कि कचरा केवल बोझ बन रहा है, तो सोचा क्यों न इसे उपयोगी रूप देकर समाज के लिए कुछ नया किया जाए। यही सोच मेरे मिशन की शुरुआत बनी और आज यह आंदोलन का रूप ले चुका है।”
उनकी यह पहल केवल जोधपुर नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है।



